समाचार लोकतंत्र सेनानी होंगे स्वतंत्रता सेनानी, मुख्यमंत्री सहित केबिनेट का आभार :26 जून को मुख्यमंत्री निवास पर होगा लोकतंत्र सेनानी सम्मलेन

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विजन

18 July 2018

आधुनिक टेक्नोलोजी के इस युग मे जब विश्व सिमटकर इन्टरनेट पर खड़ा है। मनुष्य की जिज्ञासा अधिक से अधिक जानने की है। सारा विश्व भारत की ओर इस आशा और अभिलाषा से उसकी छमताओ एवं इतिहास को जानने को उत्सुक है, विश्व का सबसे बड़ा लोकतन्त्र, सबसे पुरातन देश, सबसे पुरातन संस्कृति किन्तु सबसे अधिक युवाओ का देश, इसकी धरोहर तथा लोकतन्त्र को जानने, समझने की जिज्ञासा इस बात के लिए प्रेरित करती है की इस देश के लोकतान्त्रिक इतिहास को जाना जाए इस लोकतन्त्र के इतिहास मे आपातकाल का काला अध्याय भी जिज्ञासुओ की जानकारी के लिए उपलब्ध रहे इस हेतु यह विनम्र प्रयास है। भारतीय लोकतन्त्र यदि सुरक्षित है तो इसके लिए तपोनिष्ठ बहुतेरे बलिदानो की एक विशाल श्रंखला है, जिसमे कुछ तो तत्समय (आपातकाल मे) काल कवलित हो गए तथा कुछ उम्र के प्रवाह मे बिछुड़ गए, कुछ आपातकालीन अत्याचारो के बोझ को ढ़ोते हुए बीमारी एवं आर्थिक तंगी से संघर्ष करते हुए परलोक सिधार गए। कुछ संघर्षशील तपोनिष्ठ समाजसेवी जिन्होंने आपातकाल कि यातनाओ को सहकर भी अपने मनोबल एवं तपोबल से प्रेरणा देकर देश और समाज को लोकतन्त्र कि अमरता को अक्षुण रखने का प्रेरक बीड़ा उठा रखा है। ऐसे समस्त तपोनिष्ठ लोकतन्त्र सेनानी हमारा मार्गदर्शन कर हमारे प्रेरक बने हुए है। ऐसे समस्त ज्ञात-अज्ञात प्रजातन्त्र रक्षको, लोकतन्त्र सेनानियो के चरणों मे विनम्र आदरांजली अर्पित करते हुए उनकी स्मृतियों, अनुभवो, संघर्षो, अत्याचारो की पीढ़ा एवं संघर्ष की पराकाष्ठा का चित्रण, उनकी अपनी बात इस वेब पोर्टल के माध्यम से साझा करने का विनम्र प्रयास है। मीसाबंदीयो के पीड़ित परिवार जिंनका सामाजिक आर्थिक ढांचा बिगड़कर परिवार छिन्नभिन्न और तहस नहस हो गया उनकी पीड़ा को शब्द देने का न तो हममे साहस है और न ही सलीका फिर भी उनकी जीवन गाथा एवं प्रेरणा दायी संघर्ष हमे आपातकाल के उन 21 माह ( 26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 ) की पृष्ठभूमि का स्मरण करा सके यह उसका विनम्र प्रयास है ।